Wednesday, February 22, 2017

हर गुफ़्तगू के शुरू..

सब जान के अनजान बनी रहती हैं 

परेशान करती हैं
हर गुफ़्तगू के शुरू..
मोहतरमा सवाल करतीं हैं 
प्यार करते हो? .मगर क्यूँ??
...ये ख़याल करती हैं 

कैसे समझाऊँ उन्हें...मेरे प्यार के हैं
जामिन कुल 3 बेदर्द गवाह
एक वो ख़ुद..बे-परवाह
एक मैं.. बेबस, बेहया 
और एक अदद मेरा खुदा 

सब जान के अनजान बनी रहती हैं 
परेशान करती हैं
हर गुफ़्तगू के शुरू..
मोहतरमा सवाल करतीं हैं 
प्यार करते हो? .मगर क्यूँ??
...ये ख़याल करती है। 

Tuesday, August 2, 2016

तू ज्वलंत आग है..बर्फीला पानी है तू

तू ज्वलंत आग है..बर्फीला पानी है तू
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तू ज्वलंत आग है
और बर्फीला पानी है तू
सच तो ये है 
भारत की बिटिया सयानी है तू
तू मत रुक ....किसी के भी लिए
आगे ही आगे बस ...तू बढ़ती ही जा
कमाल पे कमाल ....
बस तू करती ही जा
पर इतना फिर भी याद रखना मेरी प्यारी बिटिया
ये अपना देश भारत है
ये बस झूठ पर चलता है
बोहोत मिलेंगे कंजक में १०-२० रुपए और चुन्नी-खिलोने तुझको
पर बेटो जैसा *मान*तो कभी मिलेगा नहीं तुझे
न बराबरी का प्यार....
न बराबरी का अधिकार....
कभी मिलेगा नहीं तुझको
पर तू फिर भी आगे ही आगे बढ़ती जाना
बिना रुके बिना थके....... क्योंकि
तू एक अकेली नहीं है
भारत की 70 करोड़ बेटियो की कहानी है तू
उनकी आकांक्षाओं की रवानी है तू
बस इतना याद रखना हरदम... हरपल...
तू ज्वलंत आग है
और बर्फीला पानी है तू
सच तो ये है
भारत की बिटिया सयानी है तू
--मन --
i wrote this poem specialy for my daughters aayu,mashoo,muskan,ishika,mansi,shiwali and khushboo.:))

Monday, January 11, 2016

एक शिशु ध्रुव-तारा

एक शिशु ध्रुव-तारा चमका
हमारे प्यारे परिवार में
नन्हा सा है ..मुन्ना सा है
वो इस सुंदर संसार में
परिवार की पाती उसको मिले
समाज में ख्याति उसको मिले
सभ्य सुसंस्कृत शालीन बने वो
तन ही नहीं मन भी सुंदर हो
यही दुआ हम सब करते है
कान्हा के दरबार में 
एक शिशु ध्रुव-तारा चमका
हमारे प्यारे परिवार में
नन्हा सा है ..मुन्ना सा है
वो इस सुंदर संसार में। 
😊🙏💐

Tuesday, December 29, 2015

"दीप सी रोशन रहना तुम.. यूँही

"दीप सी रोशन रहना तुम.. यूँही
और दुनिया भर की आकांक्षा बन जाना
अपने किरदार को,ख़ुद से भी ज़्यादा ख़ूबसूरत बनाना
और धरा से अम्बर तक विस्तृत हो जाना तुम
तुम माडर्न और कोंटेम्प्रेरी का मिश्रण बनना
सोच से माडर्न पर संस्कारो से कंटेम्परेरी होकर रह जाना तुम
सदा अपनी राह ख़ुद चुनना तुम
जीवन में निर्भय,निर्विकार आगे चलती जाना तुम

"जीवन में निर्भय,निर्विकार आगे चलती जाना तुम" 💐

यूँही किसी महफ़िल में चला आता हूँ मैं

यूँही किसी महफ़िल में चला आता  हूँ मैं
हर कही तेरा ही तसववूर ... खो जाता हूँ मैं
दोस्त कहते है क्यूँ तू उदास उदास सा रहता है ऐ "मन"
क्या कहु,किससे कहु किसकी याद में मरा जाता हु मैं 😔

--मअन🌙🌹

अक्सर तेरे शहर के नज़दीक तक आता जाता हूँ मैं

अक्सर तेरे शहर के नज़दीक तक आता जाता हूँ मैं
हर ख़ूबसूरत श मैं तेरी ख़ुशबू महसूस कर पाता हूँ मैं
बहुत सोचता हूँ कि कभी मिलूँ तुम्हें,साथ कॉफ़ी पियूँ तुम्हारे 
ज़िंदगानी की मसरूफ़ियात से मगर हार जाता हूँ मैं
क्यूँ नहीं ,कभी यूँही ,यकायक तुम ही आ जाओ दीवाने के शहर 😊
बस इसी हसीन ख़्वाब में ज़िंदगानी जिए जाता हूँ मैं। 

Tuesday, December 8, 2015

अब तो खुद मुझको को भी अपनी ज़रूरत नहीं है "मन

अब तो खुद मुझको को भी अपनी ज़रूरत नहीं है "मन"
वो भी क्या दिन थे सारी कायनात की ज़रूरत हम थे। 
--man🌙🌹