Wednesday, May 10, 2017

एक अंधेरे कोने में पड़े...

एक अंधेरे कोने में पड़े
हर पल ये गुहार... लगाई मैंने
के साँस रूकती है मेरी
क्यूँ ये सज़ा पायी मैंने
कुछ तो समझो
के 25 साल की तपस्या है मेरी
निस्वार्थ प्यार किया...
कोई पाप नहीं किया मैंने
तेरा ख़ूबसूरत जिस्म जो सबकी..
आरज़ू होगा शायद
रूह को जाना..जिस्म तो कभी ठीक से ..देखा नहीं मैंने
तेरी ख़ुशबू महकाए
मेरे जीवन-रेगिस्तान को
यही एक छुईमुई सी उम्मीद
बस है उगाई मैंने...
एक अंधेरे कोने में पड़े
हर पल ये गुहार... लगाई मैंने
के साँस रूकती है मेरी
क्यूँ ये सज़ा पायी मैंने...
-मन 🌙🌹

Monday, May 1, 2017

फ़क़त एक गुज़ारिश है मेरी..

फ़क़त एक गुज़ारिश है मेरी.. ज़ानेजाना तुमसे
जब तुम मिलोगी तब
चेहरे की जर्द लकीरों को नहीं
इस ख़ूबसूरत दिल को देख लेना
चेहरे पे कुछ झाँइयाँ तेरे इंतज़ार की
तो कुछ ग़मे-रोज़गार की है
रूह को देख लेना
इस बेडौल शरीर को नहीं
कुछ क़ुसूर मेरी बेपरवाही का सही
तो कुछ ...तेरे इश्क़ में गुज़रते अनगिनत सालों का असर भी तो है
खिचड़ी बालों को तो ज़रूर से इग्नोर कर देना तुम
कुछ उम्र के है..
कुछ बेंइंतिहा इश्क़ के..
तो कुछ तुझे याद करते करते फ़ना हुए जाते है ..😊
-मअन 🌙🌹

Monday, April 17, 2017

तू "अभय" है

तू "अभय" है
बस इतना ही समझ 
जो तेरा है

तुझे ख़ुद ढूँढता आएगा
तू बस निश्चल,निर्मल,निर्भय बने रहना
आस और कर्मण्यता के बोहोत पास
और पाप से दूर ..
बोहोत दूर..

-मन

सूरज जैसा धरती को करता है वैसे वाला प्यार ..

सूरज जैसा धरती को करता है
वैसे वाला प्यार
ना कोई आशा..
ना अपेक्षा..
ना ही इंतज़ार..
वैसे वाला प्यार
करोड़ों सालो से हर पल..हर क्षण जलते रहना
और धरती को ऊष्मा..प्रकाश..जीवन देते रहना
वैसे वाला प्यार
जानते हुए की धरती निष्ठुर है..
और निर्मम भी...
और बेपरवाह
फिर भी अपनी ही धुन में मग्न..प्रेम-मय रहना
वैसे वाला प्यार
सूरज जैसा धरती को करता है
वैसे वाला प्यार
ना कोई आशा..ना अपेक्षा..ना ही इंतज़ार..
वैसे वाला प्यार।
-मन 🌙🌹
(ये कविता मेरे दोस्त अरुण से हुयी बातचीत से उपजी है। अरुण को साधुवाद 😊🙏💐)

Wednesday, February 22, 2017

हर गुफ़्तगू के शुरू..

सब जान के अनजान बनी रहती हैं 

परेशान करती हैं
हर गुफ़्तगू के शुरू..
मोहतरमा सवाल करतीं हैं 
प्यार करते हो? .मगर क्यूँ??
...ये ख़याल करती हैं 

कैसे समझाऊँ उन्हें...मेरे प्यार के हैं
जामिन कुल 3 बेदर्द गवाह
एक वो ख़ुद..बे-परवाह
एक मैं.. बेबस, बेहया 
और एक अदद मेरा खुदा 

सब जान के अनजान बनी रहती हैं 
परेशान करती हैं
हर गुफ़्तगू के शुरू..
मोहतरमा सवाल करतीं हैं 
प्यार करते हो? .मगर क्यूँ??
...ये ख़याल करती है। 

Tuesday, August 2, 2016

तू ज्वलंत आग है..बर्फीला पानी है तू

तू ज्वलंत आग है..बर्फीला पानी है तू
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तू ज्वलंत आग है
और बर्फीला पानी है तू
सच तो ये है 
भारत की बिटिया सयानी है तू
तू मत रुक ....किसी के भी लिए
आगे ही आगे बस ...तू बढ़ती ही जा
कमाल पे कमाल ....
बस तू करती ही जा
पर इतना फिर भी याद रखना मेरी प्यारी बिटिया
ये अपना देश भारत है
ये बस झूठ पर चलता है
बोहोत मिलेंगे कंजक में १०-२० रुपए और चुन्नी-खिलोने तुझको
पर बेटो जैसा *मान*तो कभी मिलेगा नहीं तुझे
न बराबरी का प्यार....
न बराबरी का अधिकार....
कभी मिलेगा नहीं तुझको
पर तू फिर भी आगे ही आगे बढ़ती जाना
बिना रुके बिना थके....... क्योंकि
तू एक अकेली नहीं है
भारत की 70 करोड़ बेटियो की कहानी है तू
उनकी आकांक्षाओं की रवानी है तू
बस इतना याद रखना हरदम... हरपल...
तू ज्वलंत आग है
और बर्फीला पानी है तू
सच तो ये है
भारत की बिटिया सयानी है तू
--मन --
i wrote this poem specialy for my daughters aayu,mashoo,muskan,ishika,mansi,shiwali and khushboo.:))

Monday, January 11, 2016

एक शिशु ध्रुव-तारा

एक शिशु ध्रुव-तारा चमका
हमारे प्यारे परिवार में
नन्हा सा है ..मुन्ना सा है
वो इस सुंदर संसार में
परिवार की पाती उसको मिले
समाज में ख्याति उसको मिले
सभ्य सुसंस्कृत शालीन बने वो
तन ही नहीं मन भी सुंदर हो
यही दुआ हम सब करते है
कान्हा के दरबार में 
एक शिशु ध्रुव-तारा चमका
हमारे प्यारे परिवार में
नन्हा सा है ..मुन्ना सा है
वो इस सुंदर संसार में। 
😊🙏💐