Saturday, June 13, 2020

वो चुड़ैल-20

"नीना तेरा दिमाग खराब हो गया है क्या ?
तेरी शादी मुरुगन से ??
कहाँ तू , कहाँ वो मद्रासी
उसकी कोई पर्सनालिटी भी है
तू इतनी स्मार्ट, खूबसूरत
इंटेलीजेंट मॉडर्न लड़की
और वो ?
क्या है वो ?
तुम दोनों का कोई मेल भी है  ? "

SHO साब चिल्लाये थे

"हां पापा कोई मेल नहीं है
सच में कोई मेल नहीं है
वो इतना इंटेलीजेंट,
स्कॉलर,
बी टेक , MBA LONDON
इतनी अच्छी नौकरी
मैं केवल MBA,
और इतने बुरे मार्क्स लिए हैं मैंने की
कोई भी नौकरी मिलना मुश्किल है "

"पापा लुक्स ही सब कुछ नहीं होते
और सच कहूं तो लुक्स भी उसके मुझसे अच्छे है
हाँ बस रंग मेरा गोरा है "
नीना बोलते-बोलते हँस पडी थी

नीना को बच्चों की तरह हँसता देख
अब SHO साब भी कुछ नरम पड़ गए थे
"पर नीना बेटे
हम पंजाबी
वो मद्रासी
रीत-रिवाज
कल्चर कितना फ़र्क़ है बेटे
सारे रिश्तेदारी में क्या मुँह दिखाऊंगा मैं  ? "

"पापा आप ये कह रहे हैं ?
आप  ?
आप कब से रिश्तेदारों की इतनी परवाह करने लगे
हम दो बहनें थीं
सब रिश्तेदारों ने आपको कितना कहा
एक बेटा तो होना चाहिए और बच्चे करो
आपने सब को चुप कराया
आप ही तो फख्र से कहते हो, मेरे दो बेटी हैं
पर तुम सब के सौ बेटों पर भारी हैं मेरी बेटियां
आपकी बेटी ने ये फैसला बहुत सोच-समझ कर किया है
पापा , आप मुझ पर विश्वास करो
मैं खुश रहूँगी
वो बहुत अच्छा है पापा
मान जाओ ना
मेरे अच्छे पापा "
नीना बच्चो की तरह पापा के गले में झूल गयी
जैसे बचपन में करती थी

नीना कहना तो और भी बहुत कुछ चाहती थी के पापा

" इन पिछले छे महीनों में ,
मैं और मुरुगन एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए है
पिछले तीन महीने से तो हम दोनों साथ रह भी रहे हैं
तो ये फैसला हम बहुत देख-समझ कर कर रहें हैं
कोई जल्दबाज़ी में नहीं
बहुत प्यार करता है मुरुगन मुझसे
और मैं भी उसे जी-जान से चाहती हूँ
वो मुझे खुश रखेगा "

पर कहाँ कह पायी नीना इतना सब पापा से
वो खुद को कितना भी मोड्रन समझ ले पर आज भी
भारत में लडकियां कहाँ इतना खुल के माँ-बाप के सामने अपना मन खोल पाती हैं
पर नीना ने घुमा-फिर के ही सही
अपना पासा तो फेंक दिया था

और इस राम बाण का SHO साब के पास कोई तोड़ नहीं था

"ओके मेरी चुड़ैल "

हँसते हुए SHO साब ने हार मानते हुए कहा था
( SHO साब नीना को बचपन से ही वो प्यार से छेड़ते थे , चुड़ैल बोलकर )

"पापा आपने दोबारा चुड़ैल कहा ना तो मैंने कभी आपसे बात नी करनी  "

नीना ने झटके से SHO साब की गर्दन छोड़ी
और नकली गुस्से से पैर पटकते हुए बोली

और फिर दोनों बाप-बेटी हॅसते हुए गले लग गए
"मेरी प्यारी चुड़ैल "
"मेरे प्यारे पापा "

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वो चुड़ैल-19

"हैलो "
नीना ने नींद में ही फोन उठा कर
झुंझला कर बोला था
"हैलो नीना मैं मुरुगन "
नीना झटके से बिस्तर पे बैठ गयी थी
"मुरुगन तुम इतने सालों बाद "
मुरुगन खुलकर हॅंस कर बोला
"नीना तुम अभी भी नींद में हो
तुमने खुद मुझे कल देर रात पेज किया था "
"आ सॉरी "- नीना सर पे हाथ मारकर हँसी
"एंड व्हाट्स न्यू "
मुरुगन फिर हँसा
"हर क्षण नया है नीना "
और फिर वो दोनों दो घंटे लगातार बस
यहाँ की,  वहाँ की
पुराने मोहल्ले की
बचपन से दोस्तों की
अपने घर वालों की
फिर अपने-अपने कॉलेज
अपने चैलेंजेज
अपने अचीवमेंट्स
अपने सपने
मतलब सारे जहाँ की बातें बस किये जा रहे थे
समय रुक सा गया था
डोरबेल की कर्कश आवाज़ से नीना होश में आयी
फिर फटाफट तय हुआ की दो दिन बाद संडे को
ब्रेकफास्ट पर "मवाली " में मिलते हैं

शनिवार शाम से ही नीना बैचैन थी
क्या ड्रेस पहनू
कौनसी स्लीपर्स या जूते
क्या ज्वेल्लेरी
वो खुद पर हैरान थी की वो तो ऐसे बर्ताव कर रही है
जैसे वो कोई डेट पे जा रही हो
आखिरकार जैसे-तैसे तैयार होकर वो
धड़कते दिल से वो "मवाली"पहुंच ही गयी
नीना ने समय देखा वो 15 मिनिट पहले ही पहुंच गयी थी
नीना को खुद पर गुस्सा आ रहा था
अभी उसने गाड़ी पार्क की ही थी की
किसे ने धीरे से उसका दरवाज़ा खोला
"हाय नीना "
वो मुरुगन ही था
नीना तो देखती ही रह गयी
बढ़िया बिज़नेस सूट, ब्लैक ग्लासेस
हाथ में सुर्ख गुलाबों का एक बुके
और आज वो उतना भी काला नहीं लग रहा था जितना स्कूल डेज में दिखता था :)
बल्कि
वो ....
वो तो आज गज़ब का हैंडसम लग रहा था

मुरुगन ने हाथ आगे बढ़ा कर नीना को कार से बाहर उतरने में हेल्प की
संडे का दिन था काफी यंग कपल्स थे वहां उस वक़्त
पूरी चहल -पहल थी
नीना ने महसूस किया की पार्किंग से रेस्टॉरेंट तक चलते हुए
लगभग सारे लोग उन दोनों की और ही देख रहे है
लड़कों की आँखों में अपने लिए प्रसंशा
और लड़कियों की आँखों में अपने लिए जलन उसे दिखी
पर हैरानी सबकी आँखों में थी
क्योंकि नीना ठहरी गोरी चिट्टी पंजाबी गर्ल
और मुरुगन
टॉल ,डार्क, हैंडसम विथ साउथी मुस्टैच बॉय

क्यों हम लोग दो अलग-अलग दिखने वाले लोगों के साथ-साथ होने को बहुत ही अजीब नज़रों से देखते है
चाहे फिर दोनों की लम्बाई में फ़र्क़ हो 
या शारीरिक बनावट में 
या लुक्स में 
या फिर उनकी त्वचा के रंग में 

मतलब केवल एक जैसे लोग ही साथ-साथ ...... :)
क्या अजीब रीत है 

नीना और मुरुगन साथ बैठे तो
उनके बीच बरसों का गैप था
फिर से वही पुरानी बातें चल रही थीं की
अचानक मुरुगन ने सारी बात काट कर बीच में बोला

"नीना इससे पहले के मैं हिम्मत खो दूँ
मैं कहना चाहता हूँ की
मैं आज भी तुमसे प्यार करता हूँ
विल यू बी माइन ......."

"फ्रेंड "
नीना मुरुगन की बात को बीच में ही काट कर बोली थी
"हाँ मुरुगन हमें पहले दोस्ती से शुरू करना चाहिए
फिर देखते हैं के ये कहाँ तक पहुँचता है "

मुरुगन प्रशंसा भरी निगाहों से नीना को देख रहा था
कुछ रूककर मुरुगन बोला
"नीना तुम आज भी कितनी समझदार हो "
"नहीं मुरुगन मैं कभी समझदार नहीं  थी
समझदार होती तो तुम्हारे साथ उस समय इतना बुरा व्यवहार .... "
शर्मिंदगी से नज़रें झुका ली थी नीना ने

"नहीं नीना तुम तब भी सही थी
तुम आज भी सही हो "
"क्या था मैं उस समय ??
फर्स्ट ईयर में
तुम्हारे प्यार में पड़ने से मेरा मन पढ़ाई से हट गया था
बहुत बुरे मार्क्स आये थे मेरे
उस रिजेक्शन बाद मेरे मन में एक फायर पैदा हुयी थी की
मुझे तुम्हारे लायक बनना है
और मैं पढता गया, बढ़ता गया "
"मेरे मन में
मैं तुम्हारे साथ जुड़ा हुआ था तो कभी
कोई और भटकाव आया ही नहीं जीवन में
तो बस मंज़िलें मिलती गयी
रास्ते आसान होते गए
"आज मैं जो कुछ हूँ नीना
तुम्हारी वजह से , तुमसे प्यार करने की वजह से "
- मुरुगन कहीं सोचता सा गुम सा बोले जा रहा था

"सच"- नीना ने भावुक होकर मुरुगन का हाथ थाम लिया था
"बिलकुल सच 100 %"- खुलकर हॅसा था मुरुगन

नीना सोच रही थी
"ये मुरुगन भी कितना अच्छे दिल वाला लड़का है
इसने मेरे बुरे बर्ताव को भी इतने अच्छे से हैंडल किया
अगर प्यार लोगों को इतना अच्छा इंसान बना देता है
तो मुझे भी कम से कम एक बार तो प्यार करके देखना ही चाहिए "

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Friday, June 12, 2020

MEER TAQI MEER (SHER)



नाज़ुकी उसके लब की क्या कहिये 
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है 
मीर उन नीमबाज़ आँखों में 
सारी मस्ती शराब की सी है। 

Meer Taqi Meer ने ये शेर आपके लिए ही लिखा होगा 
कुछ बस 270 साल पहले ही  :)

"सात्विक-संयमित जीवनशैली" (MINIMALISM)


MINIMALISM 
शब्द का हिंदी में अर्थ तो मुझे अभी ठीक से मालूम नहीं है
पर अगर मैं अर्थ को शब्दों में बाँधने की कोशिश करूँ तो
इसका अर्थ हगा

एक ऐसी जीवनशैली जिसमे जीवन की खुशी 
ज्यादा पैसे,लम्बी कार,बहुत बड़ा मकान,लेटेस्ट मोबाइल फोन 
और बहुत सारी अन्य चीज़ों पर आश्रित नहीं होती 
क्योंकि खुशी चीज़ों में है ही नहीं
बल्कि लोगों के साथ में है 
मतलब  
"सात्विक-संयमित जीवनशैली"

आज हम नयी लेटेस्ट कार खरीद लाते है, तो बहुत खुश होते है
नया लेटेस्ट मोबाइल लाते हैं, तो हम फूले नहीं समाते  
और जैसे ही हमारा कोई पड़ोसी , मित्र या रिश्तेदार हमसे बेहतर कार या मोबाइल ले आता है 
या उसी कार या मोबाइल का नया/बेहतर वर्ज़न आ जाता है 
हम दुखी हो जाते है
आपको क्या लगता है
ये मोबाइल कंपनियां हर 2 -3 महीने में ही अपने प्रोडक्ट्स का नया वर्ज़न क्यों ले आती है 
या पिछले वर्ज़न को ऑउटडेट घोषित क्यों कर देती है ?

" बिना हमारी जरुरत के हमें एक और उत्पाद बेचने के लिए "

हम और बड़ा घर खरीदते हैं क्योंकि 
हमें ज्यादा और ज्यादा अलमारियां चाहिए ,
और ज्यादा जगह चाहिए 
क्यों ?
क्योंकि हर तीज-त्यौहार ,शादी ब्याह के मौसम में 
टीवी,मोबाइल,न्यूज़ पेपर,हर रास्ते पे लगा होर्डिंग 
हमें यही बताता है की

हमें और ,और कुछ,बहुत कुछ और खरीदना है

हमारी अलमारियाँ कपडे,जूते,जेवेलरी  और ना जाने किस-किस सामान से भरी पडी है 
शोरूम और ब्रांड्स की दो पर तीन फ्री टाइपो स्कीम्स हमें और प्यासा बनाती है 
और हम एक शर्ट या साड़ी खरीदने गए होते हैं
और ये स्कीम्स हमें तीन-चार खरीदवा देती है 
ये स्कीम्स बनायी ही जाती है मानव के मष्तिष्क को पढ़ कर 
जो आज AI (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) की मदद से सारे ब्रांड्स और कम्पनियाँ कर रही हैं 
उनकी पूरी कोशिश है की हमारी जेब का एक-एक रुपया निकलवा लिया जाये 
इतना ही नहीं क्रेडिट कार्ड और इन्सटॉलमेंट स्कीम्स के जरिये ये ब्रांड्स और कंपनियां 
हमारे आने वाले बीस-तीस वर्षों तक की कमाई को भी आज ही अपने नाम कर लेते है

" फिर उसी दिन के बाद से हम अपने लिए नहीं बल्कि 
   बैंक, इन ब्रांड्स और कंपनियों के लिए कमा रहे होते हैं "

एक-एक,दो-दो बार पहने हुए अनगिनत कपडे ,जूते और सामान हो सकते है 
हमारे घर की अलमारियों में

मेरे पापा अक्सर कहते थे की
" जिस वस्तु को आपने पिछले पूरे एक पूरे साल में यूज़ नहीं किया  , 
   99 % संभावना है की 
  आपको उस वस्तु की जीवन में कभी भी जरुरत नहीं पड़ेगी,
   वो वस्तु फ़ालतू है आपके लिए 
   अच्छा होगा आप उस वस्तु को बेच दो
   या 
   दान दे दो "

उनका मतलब था एक पूरे साल में सारे मौसमों के सीजन निकल गए 
सर्दी,गर्मी,बरसात ,जब पूरे साल में उस वस्तु की जरुरत नहीं पडी
तो अब भविष्य में भी कभी नहीं पड़ेगी 

बड़ा घर ,मतलब ज्यादा जगह ,मतलब ज्यादा कीमत ,ज्यादा बड़ा बैंक लोन, बड़ी मंथली इन्सटॉलमेंट,मतलब ज्यादा पैसे कमाने के लिए दिन-रात काम करो
और बड़ा घर तो ज्यादा साफ़-सफाई-मेन्टेन्स कॉस्ट , मतलब साफ़-सफाई करने वाले ज्यादा लोग , मतलब हमारी प्राइवेसी में ज्यादा लोगों की एंट्री , मतलब कई तरह की मुसीबतें , मतलब ज्यादा घर-खर्च- सैलरी, घर से कैश और छोटी चीज़ों की रोज़ाना चोरी,कहीं  घर के बच्चों का यौन-शोषण और कहीं बाल-मज़दूरी कराने से गरीब बच्चो का शोषण इत्यादी 

हम घर में बड़ी पार्किंग बनाते है
पर कार हमने बाहर रोड पर ही खड़ी करनी है
घर की बड़ी गाड़ियां जैसे BMW/ऑडी महीने में एक-दो बार ही चलती हैं 
क्योंकि ना उसे चलाने के लिए शहर में अच्छे रोड है और ना ही हमारी जेब में उसे चलाने लायक खर्चा 
इन कारों का एक बार का कार सर्विस का बिल ही लाख रूपये का आता है  

पुराने भारत में लोग 
"सादा जीवन उच्च विचार " 
के सिद्धांत पर जीवन जीते थे 
जो आज हम ये सब भूल गए है 
आज हमारे 
" खर्चे अनापशनाप , तो कमाने के अनापशनाप तरीके,
तो बच्चे और सारे घरवालों की अनापशनाप जीवनशैली,
तो अनापशनाप स्वास्थय और आदतें   
फिर मन के अनापशनाप भय और डर , तो अनापशनाप बीमारियाँ ,
तो फिर से हम वहीँ पहुंच गए वापिस वहीँ 
खर्चे अनापशनाप , तो कमाने के अनापशनाप तरीके "

मैंने आपको इस विषय का कुछ आईडिया देने की कोशिश की है 
बाकी आप नेटफ्लिक्स पर मूवी "MINIMALISM " देखो 
शायद जीवन की एक नयी राह मिल जाए 

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Thursday, June 11, 2020

जीवन,कोविड के बाद (लेख)

दोस्तों मुझे लगता है
आज की कड़वी सच्चाई ये है की 
इस कोविड महामारी के की वजह से 
हमारे जीवन और समाज पर बहुत ही दूरगामी प्रभाव पड़ने वाले है
कुछ प्रभाव तो आज दिखाई भी दे रहे है 
पर कुछ प्रभाव आने वाले एक साल में 
और कुछ अगले बीस सालों तक दिखाई देते रहेंगे  
सरकार ने भी शायद इसीलिए 
हमें आत्मनिर्भर बनने को कह दिया है

मैं समझता हूँ की हम सब जो यहां हैं 
कम से कम अपने दैनिक खाने-पीने की व्यवस्था करने लायक तो सक्षम हैं 
पर हमारे देश की एक बहुत बड़ी आबादी इतनी भी खुशकिस्मत नहीं है
चाहे-अनचाहे ,जाने-अनजाने या किसी मजबूरीवश 
हम सभी ने अपने किसी नौकर,ड्राइवर या अन्य कर्मचारियों को या तो काम से हटा दिया है 
या उसकी सैलरी कम कर दी है
इससे हुआ ये है की समाज का आर्थिक संतुलन जो पहले ही खराब था,
अब और बहुत ही खराब हो जाएगा
इससे समाज में छीना-झपटी,चोरी-डकैती ,फ्रॉड,अपहरण,वैश्यावृति,बच्चों का शारीरिक शोषण 
बहुत तजी से बढ़ेगा 
कुछ तो अपराधी तत्व या गैंग इस समय में विवश लोगों को अपने साथ मिलाने को प्रलोभन देंगे 
और कुछ लोग मजबूरीवश स्वयं भी पेट की आग के वशीभूत 
इन अपराधों में लिप्त होने पे मजबूर हो जायेंगें 
ये एक बहुत ही गंभीर स्तिथि है
इस स्तिथि को सरकार को देखना था पर शायद साधनों की कमी से वो ऐसा नहीं कर पाई है
  
मुझे लगता है की हमें अपने लिए तुरंत प्रभाव से कुछ फैसले लेने चाहिए 

-यथाशक्ति जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके गरीब लोगों की सहायता करनी चाहिए

-हमें अपने घर,ऑफिस,फैक्ट्री,गोदाम,कार,लाकर,ऑनलाइन बैंक अकाउंट के ताले/कोड तुरंत बदलने चाहिए
और उसकी पहुंच कम से कम लोगों तक हो
सिक्योरिटी कैमरा होने चाहिए   

-अपने फॅमिली हेल्थ इन्शुरन्स को कम से कम बीस लाख साल सालाना का करने की कोशिश करें
( कोविड का हॉस्पिटल बिल आज करीब 12 लाख रूपये आता है )

-घर में कमाने वाला हर सदस्य अपना कम से कम एक करोड़ रूपये या और भी ज्यादा का लाइफ इन्शुरन्स भी लेने की कोशिश करे
और घर के बाकी सदस्य कमाने वाले सदस्यों को मानसिक शक्ति-शांति  देते रहें
(कृपया ध्यान दें की उस व्यक्ति पर आज कई तरीके के अतिरिक्त दबाव भी हैं )

-हम घर से बाहर निकलते समय कोई भी कीमती ज्वेलरी ना पहने और ना ही कैश साथ लेकर चले
और ना ही ज्वेलरी और कैश घर में रखें
रखना ही है तो बैंक लॉकर में रखें 
ठन्डे दिमाग से सोचे और इस ज्वेलरी पहनने की झूठी शान से ही बचें

अगर हम समर्थ है तो हम आर्टिफिशल भी पहनेंगे तो लोगों को असली लगेगा
और अगर हम इतने सामर्थ्यवान नहीं है तो चाहे कितना भी सोना -हीरा पहन लेना,
लोगों को नकली ही लगेगा 
तो दोनों ही केस में हमको असली सोना-हीरा पहने का कोई औचित्य ही नहीं है 

ये सोना-हीरा और कैश केवल बस हमारी जान को जोखिम में डालेगा

हम हिम्मत करें,
और अपनी सारी ज्वेलरी को बेच दें
और सारे पैसे को अपने ऊपर चल रहे 
-पुराने लोन(होम,कार,बिज़नेस,पर्सनल,क्रेडिट कार्ड इत्यादि ) को चुकाने में
-बैंक फिक्स्ड डिपाजिट कराने में 
-प्रॉपर्टी खरीदने में लगा देना चाहिए 

(आज वही व्यक्ति सबसे ज्यादा दुखी है,
जिस पर किसी भी प्रकार के लोन,ब्याज और किराया देने का भार है

और वो व्यक्ति सबसे ज्यादा सुखी है
जिसे किराया,ब्याज ,डिविडेंड आदि ऐसी ही किसी भी तरह की आमदनी आती है )

-हमें शोशेबाज़ी के हर खर्चे से बचना चाहिए  ,
या कम से कम लोन लेकर ये खर्चे करने से तो हर हालत में बचना चाहिए 


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वो चुड़ैल,-18

अब युहीं तो नहीं लिखा ग़ालिब ने

"ये इश्क़ नहीं आसान
इतना समझ लीजे
एक आग का दरिया है
डूब के जाना है "

सो गौरव, नाज़, सुरेंदर, शिल्पी और नीना
सब इस आग के दरिया में जल रहे थे
परेशान थे
बाकी चारों का कारण तो इश्क़ था
पर नीना का कारण था दोस्ती
और अपने दोस्तों
गौरव और नाज़ के लिए उसकी केयर,
उसकी फ़िक्र

पर कहते है ना की
"टाइम इज़ ए बेस्ट हीलर "
तो कुछ दिन में ये सब उलझने भी खुदबखुद सुलझ गयीं
तस्वीर साफ़ हो गयी थी
सुरेंदर और शिल्पी की गलतफहमी दूर हो गयी थी
और सुरेंदर ने जाने कैसे
पर नाज़ को भी कन्विंस कर लिया था
अब अब सुरेंदर और नाज़ फिर से साथ थे
और ये होने से गौरव की रही-सही उम्मीद भी ख़त्म हो गयी
तो वो भी दिल पे पथ्थर रखकर
बस पढ़ाई में डूब गया

इस पूरे वाकये के बाद नीना को जीवन में पहली बार ये एहसास हुया की
हम सब आखिरकार बस लुक्स पे ही तो मरते हैं
नाज़ ने गौरव को अच्छी तरह से जानते के बाद भी के
गौरव कितना हम्बल ,कितना सेंसिबल,
कितना सबका ख़याल करने वाला था गौरव 
और कितना काइंड हार्टेड है
पर नाज़ ने गौरव को के ऊपर प्लेबॉय सुरेंदर को चुना था
क्यों ?
क्योंकि वो हैंडसम ज्यादा है
क्योंकि उसकी गर्लफ्रेंड बन जाने में
नाज़ को पूरे कॉलेज में ज्यादा अटेंशन मिलती
बस अच्छे लुक्स और दुनिया की अटेन्शन
इसके अलावा क्या और कुछ मैटर ही नहीं करता क्या ?

पर नीना खुद भी कहाँ इस लुक्स फोबिआ से अछूती थी
बरसों पहले उसने भी तो बिलकुल यही किया था
जो आज नाज़ ने किया है
जब उसके पड़ोस में रहने वाले चेन्नई बॉय "मुरुगन" ने
नीना को फ्रेंडशिप के लिए प्रपोस किया था
कितना हँसी थी नीना उसके प्रपोजल पे
उसके नाम का भी बहुत मज़ाक बनाया था उसने
"मुरगन :) "
और उसके लुक्स की तो जो कॉमेडी फिल्म बनाई उसने
बाकी पड़ोस के फ्रेंड्स के साथ मिलके
जबकि मुरुगन का कॉम्प्लेक्शन ही बस डार्क था
वो स्मार्ट था और पढ़ाई में हमेशा स्कॉलर
मुरगन ने तभी दिल्ली आईआईटी में बी.टेक. क्रैक किया था
बहुत बड़ी बात थी ये
और नीना ने टेंथ बोर्ड में बस पासिंग मार्क्स लिए थे
पर अपनी खूबसूरती के दम्भ में
उसने बिना एक पल सोचे मुरुगन को रिजेक्ट कर दिया था
मुरुगन कितना निराश हुआ था अपने रिजेक्शन पे
पर अपनी सब पड़ोस के दोस्तों के सामने हुयी इंसल्ट के बाद भी वो
डबडबायी आँखों से बस मुस्कुराता रहा था

आज भी मुरुगन नीना के हर बर्थडे पर कार्ड जरूर भेजता था
और साथ में एक नोट भी
" के वो अब कहाँ है
क्या कर रहा है "
नीना से रहा नहीं गया
उसने अपना मैजिक बॉक्स निकाला
जिसमे नीना अपने सारे लेटर्स,कार्ड्स ,गिफ्ट्स संभाल के रखती थी
उसे मुरुगन का भेजा आख़िरी ग्रीटिंग कार्ड मिल ही गया
इतने बरसों में पहली बार नीना ने मुरुगन का कार्ड ठीक से पढ़ा था
वर्ना तो वो बस ऐसे ही बॉक्स में डाल देती थी
"डिअर नीना ,
हैप्पी बर्थडे
लास्ट मंथ ही ट्रेनिंग पे जर्मनी आया हूँ
बहुत ठण्ड है यहाँ
और अभी तो जनवरी तक यहीं रहना है
फिर मेरी पहली जॉब के लिए बंगलौर में ही पोस्टिंग है
पता चला था की तुम भी बंगलौर में ही पढ़ रही हो
मेरा पेजर नंबर 9999996029 है
अगर कभी बात करना चाहो तो .......
-मुरुगन "

अब तो फरवरी चल रहा था
मतलब मुरुगन अब यहीं बंगलौर में ही होगा
वो कार्ड पढ़कर
नीना उस सारी रात सो नहीं पायी थी
हज़ारों ख़याल मन में थे
"क्या मुरुगन आज भी मुझ से....
"क्या मुझे फोन करना चाहिए ...
"कहीं मुरगन ये ना सोचे की ...

हज़ारों क्यों,कहीं ,कैसे चल रहे थे नीना के मन में

आखिरकार जब नीना से रहा ना गया तो
नीना ने फोन उठाया
पेजर कंपनी में मैसेज छोड़ा
"मुरुगन
मेरा बंगलौर पीजी का लैंडलाइन नम्बर है 7777777
कभी चाहो तो फोन करना
-नीना "

अब जाने क्या नया होने वाला था
इश्क़ में पूर्वाभास करना तो नामुमकिन है ना :)

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Wednesday, June 10, 2020

आँखों के सागर


" उन आँखों के सागर से , 
बरसों शराब पी रे "मन"
आज नशा होगा कैसे , 
जब उनमें गंगा-जमुना हन "